नारायण, शास्त्री, केलकर को ज्ञानपीठ पुरस्कार

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा| पुनः संशोधित शनिवार, 22 नवंबर 2008 (18:53 IST)
वर्ष 2005 के के लिए हिन्दी के प्रख्यात कवि और वर्ष 2006 के लिए कोंकणी के और के विद्वान सत्यव्रत शास्त्री को संयुक्त रूप से चुना गया है।

ज्ञानपीठ की विज्ञप्ति में यह जानकारी देते हुए बताया गया है कि हिन्दी कवि कुँवर नारायण को 41वाँ और कोंकणी लेखक रवीन्द्र केलकर तथा संस्कृत विद्वान सत्यव्रत शास्त्री को 42वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार संयुक्त रूप से दिया जाएगा।

विज्ञप्ति के अनुसार कोंकणी और संस्कृत के लिए पहली बार ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया है। तीनों ही रचनाकार साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। तीनों को उनकी रचनाशीलता के लिए अनेकों पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
गौरतलब है कि हिन्दी कविता के शलाका पुरुष कुँवर नारायण का जन्म 1927 में हुआ। नई कविता आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर नारायण अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरा सप्तक (1959) के प्रमुख कवियों में रहे हैं।

कुँवर नारायण को अपनी रचनाशीलता में इतिहास और मिथक के जरिये वर्तमान को देखने के लिए जाना जाता है। उनकी प्रमुख रचनाओं में आत्मजयी आकारों के आसपास और चक्रव्यूह आदि शामिल हैं।
रवीन्द्र केलकर का जन्म सात मार्च 1925 में दक्षिण गोवा के कोकुलिम इलाके में हुआ। वे कोंकणी साहित्य के सबसे मजबूत स्तंभ हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में आमची भास कोंकणीच, बहुभाषिक भारतान्त भाषान्चे समाजशास्त्र शामिल हैं।

संस्कृत के विद्वान प्रो. सत्यव्रत शास्त्री महत्वपूर्ण मनीषी रचनाकार हैं। वे तीन महाकाव्यों के रचनाकार हैं, जिनमें से प्रत्येक में लगभग एक हजार श्लोक हैं। वृहत्तमभारतम, श्री बोधिसत्वचरितम और वैदिक व्याकरण उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।


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