अंग्रेजी नहीं, हिन्दी बनाती है दिमाग को चुस्त

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
यदि आप हिन्दीभाषी हैं और आधुनिक सभ्यता के शौकीन होकर बिना जरूरत अंग्रेजी बोलने की लत पाल चुके हैं तो जरा सावधान हो जाइए। देश के वैज्ञानिकों ने कहा है कि अंग्रेजी की तुलना में हिन्दी भाषा बोलने से मस्तिष्क अधिक चुस्त-दुरुस्त रहता है।

राष्ट्रीय मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र के डॉक्टरों ने एक अनुसंधान के बाद कहा है कि हिन्दीभाषी लोगों के लिए मस्तिष्क को चुस्त-दुरुस्त रखने का सबसे बढ़िया तरीका यही है कि वे अपनी बातचीत में अधिक से अधिक हिन्दी भाषा का इस्तेमाल करें और अंग्रेजी का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर ही करें।

विज्ञान पत्रिका ‘करंट साइंस’ में प्रकाशित अनुसंधान के पूरे ब्योरे में मस्तिष्क विशेषज्ञों का कहना है कि अंग्रेजी बोलते समय का सिर्फ बायाँ हिस्सा सक्रिय रहता है, जबकि हिन्दी बोलते समय मस्तिष्क का दायाँ और बायाँ दोनों हिस्से सक्रिय हो जाते हैं। इससे दिमागी स्वास्थ्य तरोताजा रहता है।
राष्ट्रीय मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र की भविष्य में अन्य भारतीय भाषाओं के प्रभाव पर भी करने की योजना है। (भाषा)


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