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संजय दत्त को मिले उसके किए की सजा

-जया किशनानी

भाषा|
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भारतीय राजनीति के कर्णधार निश्चित रूप से महान हैं और उनकी महानता का ताजा उदाहरण है कांड में दोषी सिद्ध हो चुके सिने अभिनेता को बचाने की सिलसिलेवार मुहिम।

सबके लिए बराबर होना चाहिए। यह सत्य है, लेकिन इस सत्य को संजय दत्त के मामले में किस प्रकार लिया जा रहा है, यह देश की जनता के सामने है। अधिकांश राजनैतिक दलों के नेतागण संजय दत्त को माफी दिए जाने के पक्ष में एक मंच पर आ खड़े हुए हैं और ऐसे दल जिनकी इस मसले पर राजनीति दांव पर लग सकती है, वे चुपचाप मूकदर्शक बने अपना मौन समर्थन दे रहे हैं।

इस संपूर्ण मसले पर हाय-तौबा मचाने से अच्छा होगा कि हम न्यायपालिका के निर्णय का सम्मान करें एवं दोषी व्याक्ति चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो, उसे उसके किए की सजा मिले
धन्य हैं हमारे भारतीय राजनेता जिन्होंने संजय दत्त के मुद्दे पर कानून की परिभाषा को बदलने का प्रयास ही शुरु कर दिया है। संभव है कि अब संजय दत्त बदल चुके हों एवं उन्हें अपने किए पर पछतावा हो, लेकिन क्या यह उचित होगा कि एक बड़े अभिनेता के लिए कानून की परिभाषा को ही बदल दिया जाए? क्या इस सजा माफी के मसले को भविष्य में अन्य लोग उदाहरण के रूप में नहीं लेंगे?

इस संपूर्ण मसले पर हाय-तौबा मचाने से अच्छा होगा कि हम न्यायपालिका के निर्णय का सम्मान करें एवं दोषी व्याक्ति चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो, उसे उसके किए की सजा मिले, इस दिशा में अपनी सोच को बढ़ाएं, ताकि भविष्य में कोई अन्य संजय दत्त न बने।
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