भारत में दंगों का इतिहास और राजनीति

WD| पुनः संशोधित बुधवार, 11 सितम्बर 2013 (13:02 IST)
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भारत में दंगों की शुरुआत आजादी के आंदोलन में छुपी हुई है, जब अंग्रेजों को हिन्दू और मुसलमानों की एकता तोड़कर यहां राज करना था। वे इस कार्य में सफल भी हुए। दंगों ने हिन्दू और मुसलमानों के बीच खाई पैदा कर दी जिसके परिणामस्वरूप भारत का विभाजन हुआ। जिन्ना और नेहरू जानते थे कि यह अंग्रेजों की चाल है लेकिन जिन्ना यह जानकर भी जान-बूझकर इस चाल का शिकार होना चाहते थे, खैर।

बाद में पाकिस्तान ने 1965 के युद्ध के बाद इस ओर ध्यान देना शुरू किया और उसने भारत में दंगों के लिए एक नई योजना पर काम करना शुरू किया। भारत में दंगों का होना पाकिस्तान के हित में क्यों है यह सभी जानते हैं।

जहां तक भारत के राजनीतिज्ञों का सवाल है तो इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी को छोड़ दें तो सभी भारतीय राजनेता दोहरी नीति का पालन करते हैं। उनकी कोई स्पष्ट विचारधारा कभी नहीं रही। वे छद्म लोग हैं। मौजूदा राजनेताओं में से बहुत से राजनेता का न तो कोई धर्म है, न जाति और न ही उनकी कोई संतुलित विचारधारा। उनसे सवाल पूछा जाए कि क्या उनमें देशभक्ति की भावना है? आओ जानते हैं दंगों का इतिहास और सरकारों की लापरवाही।

अगले पन्ने पर, भारत में दंगों की शुरुआत...


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