हीरा उद्योग में बढ़ेगी भारत की चमक

मुंबई (वार्ता)| वार्ता|
अगले पाँच-दस वर्षों में दुनिया में का एक बड़ा केन्द्र बनकर उभरेगा।

हीरे का कारोबार करने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी की सहयोगी इकाई डायमंड ट्रेडिंग कंपनी (डीटीसी) के मुताबिक दुनिया के 90 फीसदी हीरों के तराशने का काम भारत में होता है, ऐसे में यहाँ हीरा उद्योग के फलने-फूलने की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।
डीटीसी की महाप्रबंधक वर्दा शाइने ने सोमवार को यहाँ बताया कि सस्ते और मध्यम दर्जे के हीरों के व्यापार के साथ शुरुआत करने वाले भारतीय हीरा उद्योग ने उच्च प्रौद्योगिकी अपनाकर आज हर किस्म के बड़े और छोटे हीरों के कारोबार के साथ विश्व बाजार में अच्छी पैठ बनाई है।

सुश्री शाइने ने कहा कि दुनिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में हीरों की बढ़ती माँग को पूरा करने की क्षमता के साथ ही भारतीय हीरा उद्योग घरेलू माँग को पूरा करने में भी सक्षम बन चुका है।
उन्होंने कहा कि बाजार की इस बढ़ती क्षमता को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत दुनिया के चंद बड़े हीरा उद्योग केन्द्रों रूस और इसराइल के बराबर पहुँच जाएगा।

उन्होंने कहा कि वैश्विक मंदी के कारण अन्य विलासिता वस्तुओं के साथ ही हीरों की माँग में भी खासी कमी आई है, लेकिन इस चुनौती से निबटने के लिए डीटीसी ने कई नई योजनाएँ बनाई हैं।
उन्होंने कहा कि इसके तहत कंपनी ने कारोबारी खर्चों में कटौती करने के बावजूद ग्राहकों की माँग के अनुरूप उत्पादों की गुणवत्ता और कीमत के बीच संतुलन बनाए रखने का पूरा इंतजाम किया है।

उन्होंने कहा कि घरेलू ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी डी बियर्स ने अपने कारोबार में कई बदलाव किए हैं।


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