वायदा बाजार की डगर

WD| पुनः संशोधित बुधवार, 25 जून 2008 (16:20 IST)
-नृपेन्द्र गुप्त
लगातार आ रही मंदी के परिणामस्वरूप निवेशकों का शेयर बाजार से मोहभंग होने लगा है। दूसरी ओर बैंक में पैसा जमा करने पर ब्याज भी कम मिलता है और पैसा ब्लॉक भी हो जाता है। इस स्थिति को देखते हुए अब निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बनाकर कमोडिटी मार्केट की ओर रुख कर लिया है।

वायदा बाजार वह बाजार है जहाँ कच्चे माल का क्रय-विक्रय किया जाता है। यहाँ वर्तमान और पिछले भावों के आधार पर भविष्य के सौदे किए जाते हैं। इसमें होने वाली हलचल देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति के साथ ही मानसून, बाढ़, भूकंप आदि पर निर्भर करती है।

तेल की बढ़ती कीमतों, दलहन, सोने-चाँदी के भावों में हो रही उठापटक के कारण लोगों का रुझान इस दिशा में बढ़ने लगा है। शेयर बाजार की तरह यहाँ भी लाभ के लिए अधिक इंतजार नहीं करना पड़ता। शेयर बाजार भी वायदा बाजार का ही हिस्सा है। यहाँ पर बारीकी से नजर रखी जाए तो कम समय में अधिक लाभ मिलने की संभावना रहती है।
जोखिम भरे इस बाजार में किसी भी वस्तु की कीमत को आसमान पर ले जाया जा सकता है और आसमान से जमीन पर लाया जा सकता है। इसी वजह से जब भी किसी वस्तु के दाम सरकार के नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं तो उस वस्तु के वायदा कारोबार पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी जाती है। इसीलिए तेल, लोहे, अनाज आदि के दाम बढ़ते ही इन वस्तुओं के वायदा कारोबार पर रोक लगाने की माँग जोर पकड़ने लगती है।
अत: यदि आप निवेश करना चाहते हैं और शेयर बाजार की मंदी से परेशान हैं तो वायदा बाजार के रास्ते आपके लिए खुले हैं। यह रास्ता पथरीला तो है मगर यहाँ विकल्पों की भरमार है। आप चाहें तो धातु में निवेश करें या ऊर्जा उत्पाद में। आप दाल, चावल आदि आवश्यक वस्तुओं में भी निवेश कर सकते हैं।


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