वेदांता समूह को केन्द्र का करारा झटका

jayram remesh
नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित मंगलवार, 24 अगस्त 2010 (20:43 IST)
PIB
केंद्र ने निजी क्षेत्र की वेदांता सर्विसेज समूह पर वन एवं पर्यावरण कानून का उल्लंघन के आरोप में कार्रवाई करते हुए की उड़ीसा में उसकी 1.7 अरब डॉलर की बाक्साइट खनन की एक परियोजना की मंजूरी खत्म कर दी है।

केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश ने इस निर्णय की घोषणा करते कहा कि उड़ीसा सरकार और वेदांता के नियामगिरी पहाड़ी क्षेत्र में खनन से पर्यावरण संरक्षण कानून, वन संरक्षण और अधिकार कानून गंभीर उल्लंघन हुआ है।

वन सलाहकार समिति (एफएसी) की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि इसीलिए लांजीगढ़, कालाहांडी और रायगगढ़ा जिलों में फैले नियामगिरी पहाड़ी क्षेत्र में राज्य के स्वामित्व वाली उड़ीसा माइनिंग कॉर्पोरेशन तथा स्टरलाइट बाक्साइट खनन परियोजना के दूसरे चरण की वन मंजूरी नहीं दी जा सकती।
समिति ने राज्य सरकार के साथ वेदांता खनन परियोजना को दी गई वन एवं पर्यावरण संबंधी दीगई सैद्धांतिक मंजूरी वापस लेने की सिफारिश की थी। उधर, भुवनेश्वर में उड़ीसा के औद्योगिक एवं इस्पात था खान मंत्री रघुनाथ मोहंती ने फैसले को ‘अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि बहुत पहले परियोजना को सैद्धांतिक रूप से हरी झंडी दी गई थी, लेकिन अब केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने अचानक एवं अनुचित तरीके से दूसरी अवस्था की मंजूरी नहीं देने की घोषणा की।
वेदांता की खनन परियोजना को पर्यावरण मंजूरी को ऐसे समय खारिज किया गया है जब कंपनी को केयर्न इंडिया पर नियंत्रण हिस्सेदारी के लिये 9.6 अरब डॉलर की बोली को लेकर कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

रमेश ने इस तरह की खबरों को खारिज किया कि सरकार ने कोरियाई कंपनी पोस्को की प्रस्तावित 54,000 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी देने के लिए वेदांता की परियोजना खारिज करने का सौदा किया है।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कहा दोनों परियोजनाओं को एक जैसा बनाना ठीक नहीं है। पोस्को परियोजना क्षेत्र में भी वनवासी कानून के उल्लंघन के आरोपों की जाँच की जा रही है।

उन्होंने कहा कि वेदांता पर निर्णय का न तो कोई भावनात्मक पक्ष है और न ही इसमें कोई राजनीति या पक्षपात किया गया है। फैसला पूरी तरह कानूनी आधार पर किया गया है।
उन्होंने कहा कि फैसला सक्सेना समिति की रिपोर्ट, महालेखा परीक्षक और एफएसी की सिफारिशों पर आधारित है। वेदांता ने दलील दी थी कि पर्यावरण मंत्रालय ने 2007 में परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी।

रमेश ने कहा कि उनके मंत्रालय ने 2007 में परियोजना को सैद्धांतिम मंजूरी ही दी थी, उसे पक्की मंजूरी के रूप में नहीं लिया जा सकता। (भाषा)

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