जीम, नोवोसेलोव को भौतिकी का नोबेल

लंदन| भाषा| पुनः संशोधित मंगलवार, 5 अक्टूबर 2010 (21:17 IST)
रूस में जन्मे और अब ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय में कार्यरत दो वैज्ञानिकों को हैरतअंगेज गुणों वाले एक पदार्थ पर अभूतपूर्व कार्य करने के लिए वर्ष 2010 का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से देने की घोषणा की गई है।

ग्राफीन पर किए गए अनुसंधान के लिए आंद्रे जीम (51) और (36) को 900000 पाउंड का यह पुरस्कार देने की घोषणा की गई।

डॉ. जीम ने इस समाचार पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ। मैं अच्छे से सोया। मुझे उम्मीद नहीं थी कि इस साल का मुझे मिलेगा। सामान्य कार्बन की एक पतली परत, जो सिर्फ एक अणु की मोटाई वाली है, इस पुरस्कार के पीछे है।
नोबेल पुरस्कार समिति द्वारा जारी एक बयान के अनुसार दोनों वैज्ञानिकों ने यह प्रदर्शित किया है कि इस प्रकार के चपटे आकार में कार्बन के विस्मयकारी गुण होते हैं, जो अणु भौतिकी की विलक्षण दुनिया से आते हैं।

नोबेल पुरस्कार समिति के बयान के अनुसार ग्राफीन कार्बन की एक किस्म है। पदार्थ के रूप में यह एकदम नया है। न केवल यह सबसे पतला है बल्कि यह अब तक के पदार्थों में सबसे मजबूत भी है। बिजली का संवाहक होने के साथ साथ इसमें तांबे के भी गुण हैं। उष्मा का संवाहक होने के अलावा यह इस गुण में अन्य पदार्थों में सबसे आगे है। बयान के अनुसार, यह लगभग पारदर्शी है, इसके बावजूद यह इतना घना है कि सबसे छोटा गैस का अणु हीलियम भी इससे होकर गुजर नहीं सकता।
पृथ्वी पर जीवन का कारण बने कार्बन ने एक बार फिर हमें हमें अपने गुणों से चकित कर दिया है। गीम और नोवोसेलोव ने ग्राफीन को ग्रेफाइट के एक टुकड़े से निष्कर्षित किया है। ग्रेफाइट सामान्य पेंसिल में इस्तेमाल किया जाता है। (भाषा)


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