पीपल : अनेक गुणों से युक्त वृक्ष

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का सबके लिए जाना पहचाना है, यह हर जगह पाया जाता है। पीपल ही एक ऐसा वृक्ष है, जो चौबीसों घंटे देता है, इसके औषधीय गुणों को बहुत कम लोग जानते हैं।

बरगद और गूलर वृक्ष की भाँति इसके पुष्प भी गुप्त रहते हैं अतः इसे 'गुह्यपुष्पक' भी कहा जाता है। अन्य क्षीरी (दूध वाले) वृक्षों की तरह पीपल भी दीर्घायु होता है। इसके पत्ते हाथियों के लिए उत्तम चारे का काम देते हैं।

गुण : यह शीतल, भारी, कसैला, रूखा, वर्ण को उत्तम करने वाला, योनि को शुद्ध करने वाला और पित्त, कफ, घाव तथा रक्तविकार को नष्ट करने वाला है, इसके पाँचों अंग पौष्टिक होते हैं। यह वायु मण्डल को शुद्ध करता है।

उपयोग : इस वृक्ष का सबसे बड़ा उपयोग पर्यावरण प्रदूषण को दूर करने में किया जा सकता है, क्योंकि यह प्राणवायु प्रदान कर वायु मण्डल को शुद्ध करता है और इसी गुणवत्ता के कारण भारतीय शास्त्रों ने इस वृक्ष को सम्मान दिया। पीपल के जितने ज्यादा वृक्ष होंगे,वायु मण्डल उतना ही ज्यादा शुद्ध होगा।

दमा : पीपल की अन्तरछाल (छाल के अन्दर का भाग) निकालकर सुखा लें और कूट-पीसकर खूब महीन चूर्ण कर लें, यह चूर्ण दमा रोगी को देने से दमा में आराम मिलता है। पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर उसमें यह चूर्ण बुरककर खीर को 4-5 घंटे चन्द्रमा की किरणों में रखें, इससे खीर में ऐसे औषधीय तत्व आ जाते हैं कि दमा रोगी को बहुत आराम मिलता है। इसके सेवन का समय पूर्णिमा की रात को माना जाता है।

दाद-खाज : पीपल के 4-5 कोमल, नरम पत्ते खूब चबा-चबाकर खाने से, इसकी छाल का काढ़ा बनाकर आधा कप मात्रा में पीने से दाद, खाज, खुजली आदि चर्म रोगों में आराम होता है।

मसूड़े : मसूड़ों की सूजन दूर करने के लिए इसकी छाल के काढ़े से कुल्ले करें।

  इस वृक्ष का सबसे बड़ा उपयोग पर्यावरण प्रदूषण को दूर करने में किया जा सकता है, क्योंकि यह प्राणवायु प्रदान कर वायु मण्डल को शुद्ध करता है और इसी गुणवत्ता के कारण भारतीय शास्त्रों ने इस वृक्ष को सम्मान दिया।      
अन्य उपयोग : * इसकी छाल का रस या दूध लगाने से पैरों की बिवाई ठीक हो जाती है।

* पीपल की छाल को जलाकर राख कर लें, इसे एक कप पानी में घोलकर रख दें, जब राख नीचे बैठ जाए, तब पानी नितारकर पिलाने से हिचकी आना बंद हो जाता है।

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* इसके पत्तों को जलाकर राख कर लें, यह राख घावों पर बुरकने से घाव ठीक हो जाते हैं।


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