चिकित्सा विज्ञान का अनजाना पहलू - निश्चेतना

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आज जब भी किसी व्यक्ति की शल्य क्रिया होने वाली होती है तो उसके और उसके परिजनों के मन में सिर्फ यह जिज्ञासा रहती है कि दर्द तो नहीं होगा अथवा मालूम तो नहीं पड़ेगा। मरीज का अपने शल्य चिकित्सक से सिर्फ यही आग्रह रहता है कि उसे बेहोश कर दिया जाए, मगर यह मालूम नहीं होता है कि उसे कैसे बेहोश किया जाएगा, अथवा कौन उसे बेहोश करेगा।

आज हमारे देश में चिकित्सा विज्ञान ने काफी उन्नति कर ली है। यहाँ विश्व के किसी भी अन्य विकसित देश के समतुल्य शल्य क्रियाएँ की जाती हैं। इसमें निश्चेतना विज्ञान अथवा एनेस्थेशिया का महत्वपूर्ण योगदान है, किंतु खेद है कि आम आदमी को इसकी कोई खास जानकारी नहीं है और न इसके महत्व से ठीक से परिचित हैं।

क्या होता है निश्चेतना विज्ञान अथवा एनेस्थेशिया? एक सफल शल्य क्रिया के लिए जरूरी है कि एक कुशल निश्चेतना विशेषज्ञ उचित तकनीक द्वारा सफलतापूर्वक मरीज को निश्चेतन किया जाए। निश्चेतना विशेषज्ञ का काम शल्य क्रिया से पहले शुरू होता है और शल्य क्रिया खत्म होने के बाद तक जारी रहता है। शल्य क्रिया छोटी या बड़ी हो सकती है, मगर एनेस्थेशिया कभी भी छोटा या बड़ा नहीं होता।

निश्चेतना विज्ञान का मुख्य उद्देश्य है कि शल्य क्रिया के दौरान एवं उसके बाद में मरीज को किसी भी प्रकार का दर्द अथवा तकलीफ न हो, उसे शल्य क्रिया के दौरान हुई तकलीफों का स्मरण न रहे। उसके शरीर के सभी अंग जैसे कि दिल, दिमाग, गुर्दे, लीवर, फेफड़ेइत्यादि शल्य क्रिया के दौरान व बाद में सुचारू रूप से कार्य करते रहें। शल्य क्रियाओं के दौरान मांसपेशियों का तनाव कम हो, रक्तचाप नियंत्रित हो, रक्तस्राव कम हो, ताकि शल्य क्रिया चिकित्सक को अपना कार्य करने में किसी भी प्रकार की तकलीफ या परेशानी न हो और वह एक सफल शल्य क्रिया कर सके।

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- डॉ. राजेंद्र भटनागर
सर्वप्रथम निश्चेतना विशेषज्ञ मरीज से उसके स्वास्थ्य के बारे में विस्तृत जानकारी लेता है। यदि मरीज छोटा बच्चा है तो उसके माता-पिता द्वारा संपूर्ण जानकारी ली जाती है। फिर वह मरीज की अच्छी तरह से और संपूर्ण रूप से जाँच करता है। नियमित खून, पेशाब की जाँच के अलावा खून में शकर और यूरिया की जाँच कराई जाती है। यदि मरीज की आयु 35 वर्ष से ऊपर है तो छाती का एक्स-रे व कार्डियोग्राम कराया जाता है। यदि मरीज में खून की कमी है तो पहले उसे खून दिया जाता है और जरूरत पड़ने पर खून की पहले से व्यवस्था भी की जाती है।


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