उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे जातक का भविष्यफल

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: उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का पहला चरण धनु राशि में स्थित होता है तथा इस नक्षत्र के शेष 3 चरण मकर राशि में स्थित होते हैं जिसके चलते इस नक्षत्र पर धनु राशि के स्वामी ग्रह बृहस्पति तथा मकर राशि के स्वामी ग्रह शनि का भी प्रभाव पड़ता है। इस तरह उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे जातक पर सूर्य, शनि और गुरु का प्रभाव बना रहता है।

* प्रतीक : हाथी के दांत
* वृक्ष : कटहल का वृक्ष
* रंग : कॉपर
* अक्षर : ब और ग
* देवता : दस विश्‍वदेव
* नक्षत्र स्वामी : सूर्य
* राशि स्वामी : गुरु, शनि
* भौतिक सुख : पद, प्रतिष्ठा और धन
* शारीरिक गठन : सामान्य, रंग फेयर

सकारात्मक पक्ष : जन्म कुंडली में शनि व सूर्य की स्थिति उत्तम रही हो तो ये अपने शुभ परिणाम देंगे। इस नक्षत्र से प्रभावित व्यक्ति साहसी और धैर्यवान होते हैं। न्याय और नियम-कानून का संजीदगी से पालन करते हैं। ऐसे व्यक्ति प्राचीन मान्यताओं पर विश्वास रखते हैं और परिवार की मर्यादा का पालन करते हैं। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के जातकों में उचित और अनुचित में भेद कर सकने की प्रबल क्षमता होती है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का वर्ण क्षत्रिय, गण मान, गुण सात्विक और वायु तत्व है।

नकारात्मक पक्ष : जन्म कुंडली में शनि व सूर्य की अशुभ स्थिति रही तो बुरे फल मिलेंगे। हालांकि यह कुंडली के अन्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार ही तय होगा। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों को साझेदारी के काम में सजग रहना चाहिए, क्योंकि साझेदारी के काम में इन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

प्रस्तुति : शताय

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