साल 2016 : महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कोर्ट का कड़ा रुख

नई दिल्ली। किशोर न्याय कानून में विवादित संशोधन के चलते जघन्य अपराधों को अंजाम देने वाले 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाने का रास्ता खुल गया। इस संशोधन के बाद, वर्ष 2016 में सबसे पहला मुकदमा 17 वर्ष के बलात्कार आरोपी किशोर पर शहर की एक निचली अदालत में चला।
महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में अदालत का रवैया सख्त रहा और इसकी जद में पर्यावरणविद आरके पचौरी कि पीपली लाइव के निर्देशक महमूद फारुकी और आप के बर्खास्त मंत्री संदीप कुमार भी आए। 
 
ऐसे ही एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव जैन ने अपने फैसले में कहा कि आज महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है, ऐसे मामले बढ़ रहे हैं और अदालतें ऐसे अपराधियों को हतोत्साहित करने के लिए सख्त संदेश देने की जरूरत को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। ऐसे अपराधों में कठोर दंड देने की जरूरत है। वर्ष 2009 के जिगिशा घोष मामले के दो दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई। 
 
वर्ष 2014 के दानिश महिला के साथ सामूहिक बलात्कार मामले पर दुनियाभर की नजर थी। इसमें 5 खानाबदोशों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
 
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ उनके परिचित, भरोसमंद लोगों, दोस्तों, परिजनों द्वारा अपराध को अंजाम देने के मामले पूरे देश की कचोटते रहे। ऐसे मामलों में अदालतों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाते हुए कहा कि ऐसे अपराधों के दोषी हमदर्दी के लायक नहीं हैं।
 
एक अन्य आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुराधा शुक्ला भारद्वाज ने कहा कि अदालतें लड़कियों की भावनाओं और संवदेनशीलता का फायदा उठाने की ताक में रहने वाले लोगों को लाइसेंस नहीं दे सकतीं और ना ही देगीं। अमेरिकी महिला से बलात्कार करने वाले फारुकी को सात साल की जेल इस साल का चर्चित मामला रहा।
 
टेरी के पूर्व प्रमुख पचौरी के खिलाफ उनकी एक पूर्व सहयोगी द्वारा दर्ज करवाया गया यौन उत्पीड़न का मामला मीडिया में छाया रहा। पचौरी जमानत पर रहे और विभिन्न अदालतों ने उन्हें कई बार विदेश जाने की इजाजत भी दी।
 
किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) कानून, 2015 में संशोधन की आलोचना हुई। संशोधन के जरिए बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम देने वाले 16 से 18 वर्ष के किशोर अपराधियों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाए जाने को मंजूरी मिली। किशोर बोर्ड ने गत अगस्त माह में 17 वर्षीय किशोर के खिलाफ बलात्कार का मामला दंड संहिता के तहत अभियोजन के लिए नियमित अदालत में भेजा।
 
ऐसे ही अन्य मामलों में दो और व्यक्तियों को सजा हुई। सौतेली बेटी से बलात्कार करने वाले पिता को उम्रकैद और यौन उत्पीड़न कर बेटी को गर्भवती करने वाले दूसरे व्यक्ति को दस वर्ष की सजा हुई। न्यायाधीशों ने कहा कि इन मामलों में पिता और बेटी के पवित्र रिश्ते को तार-तार किया गया और बच्चों को सुरक्षित माहौल से महरुम किया गया।
 
वर्ष 2013 में छात्रा का यौन उत्पीड़न करने वाले शिक्षक को छह महीने कैद की सजा हुई, साथी छात्रा के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने और विश्वासघात करने वाले जेएनयू के छात्र अनमोल रतन को दिल्ली की एक अदालत ने हिरासत में भेजा।
 
दिल्ली की विभिन्न अदालतों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के लगभग आधा दर्जन मामले आए जिसमें आप नेताओं और विधायकों के मामले भी शामिल थे। आप के बर्खास्त मंत्री संदीप कुमार के कथित सेक्स स्कैंडल की सीडी सामने आने के बाद बलात्कार के मामले में उन्होंने दो महीने जेल की हवा खाई।
 
महिलाओं का यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, हत्या की कोशिश, घरेलू हिंसा, धमकी और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में आप के विधायक अमानतुल्ला खान, शरद चौहान, दिनेश मोहनिया और प्रकाश जारवाल तिहाड़ जेल में रहे। (भाषा)

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