विवाद जिनसे मिलकर बना वर्ष 2014

एक सतत चलने वाली ऐसी प्रक्रिया है जो कि कभी भी समाप्त नहीं होती है। इसलिए कहना गलत ना होगा कि पिछला वर्ष भी अपने हिस्से के विवाद लेकर आया और समय-समय भी पर विवाद हमारे सामने आते रहे। हालांकि विवादों का प्रमुख केन्द्र धार्मिक मामलों से जुड़े रहे हैं और कई बार तो ऐसा लगा कि भारत के ये स्वयंभू बाबा, संत, महंत, धर्मोपदेशक या स्वामी देश के कानून को भी चुनौती देने की हालत में आ गए हैं। लेकिन इनकी राज्य सरकारों के साथ चली रस्साकशी में अंतत: संबंधित राज्य सरकारें इन कथित धर्मगुरुओं को जेल में डालने में सफल हुई। 
अगर इन बाबाओं की गिरफ्तारी से जुड़े रहस्य, रोमांच और हिंसा को ध्यान में रखा जाए तो बाबा रामपाल‍ ने पिछले साल सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। सिंचाई विभाग के एक जेई से संत बने रामपाल हिंदू धर्म के भगवानों को नहीं मानते थे और वे अपने भक्तों के लिए खुद ही भगवान थे। हत्या के एक मामले में उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। अंतत: कोर्ट को उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश ‍देना पड़ा। पुलिस ने बीस नवंबर को उन्‍हें सतलोक आश्रम से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। 
 
उन्हीं की तरह से, आसाराम बापू पर भी अनैतिक कामों में शामिल होने के आरोप लगे हैं। उन्हें एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने के मामले में जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया है। वे एक से अधिक वर्ष से विभिन्न न्यायालयों से जमानत पाने की कोशिशें कर रहे हैं लेकिन अभी तक यह संभव नहीं हो सका है। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा राम रहीम पर भी हत्या के दो और यौन शोषण का एक मामला है। इसके अलावा सीबीआई हत्या के दो अन्य मामलों में उनकी जांच कर रही है। इनमें सिरसा के एक पत्रकार और एक डेरा मैनेजर की हत्या का मामला शामिल है। फिलहाल उनका नाम एक फिल्म के कारण विवादों में हैं। डेरा प्रमुख की पहली फिल्म 'एमएसजी' यानी 'मैंसेंजर ऑफ गॉड' को 16 जनवरी को रिलीज होना है। पंजाब के सिख संगठनों ने इस फिल्म को लेकर चेतावनी जारी कर दी है।
 
इस फिल्म में बाबाजी एक एक्शन हीरो के तौर प्रदर्शित किए गए हैं। वे समाज की तमाम तरह की बुराइयों का खात्मा करते हैं लेकिन पंजाब के सिख संगठनों का कहना है कि इस फिल्म में उन्होंने गुरु गोविंद सिंह से मिलती-जुलती ड्रेस पहनी है। सिखों की सर्वोच्च संस्‍था अकाल तख्त ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। फिलहाल इस मामले पर पंजाब सरकार भी जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहती है। लेकिन इस विवाद को लेकर राज्य का राजनीतिक माहौल गर्मा रहा है। 
 
इस वर्ष की शुरुआत में जब भाजपा की सरकार बनी थी तभी से उस पर शिक्षा का भगवाकरण करने के आरोप लगे थे। तब से किसी न किसी मुद्‍दे को लेकर मानव विकास मंत्री स्मृति ईरानी विवादों से जूझती रही हैं। पहले उनकी शिक्षा को लेकर सवाल उठाए गए और कहा गया कि उन्होंने शिक्षा संबंधी गलत जानकारी दी है। वे ग्रेजुएट नहीं हैं लेकिन वे खुद को अधिक पढ़ा-लिखा बताती हैं। फिर केन्द्रीय विद्यालयों में संस्कृत की पढ़ाई का मुद्‍दा उठा। इस बीच उन्होंने अपनी राजस्‍थान यात्रा के दौरान एक ज्योतिषी से अपना भविष्य पूछ लिया तो इसको लेकर हंगामा मच गया। वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों का कहना था कि देश के शिक्षामंत्री को सार्वजनिक तौर पर ऐसा करना शोभा नहीं देता है। साथ ही कहा गया है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को अवैज्ञानिक दृष्टिकोण को नहीं अपनाना चाहिए और न ही इसे बढ़ावा देना चाहिए।  
 
देश की जनता और नेताओं के सामने ‍‍‍निजी बनाम सार्वजनिक तौर पर रवैए को लेकर पहले भी मुद्‍दा खड़ा होता रहा है। इसी कारण से प्रधानमंत्री की वैवाहिक स्थि‍ति को लेकर भी सवाल उठाए गए। काफी उथल-पुथल भरा रहा। वर्ष की शुरुआत में हुए आम चुनाव में शानदार जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जहां विधानसभा उपचुनावों में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी, वहीं दूसरी ओर वर्ष के अंत तक आते-आते लव जिहाद व धर्मांतरण जैसे मुद्दों की गूंज संसद तक सुनाई दी। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाख नसीहतों के बाद भी उप्र के सांसदों व मंत्रियों के विवादित बयानों ने जमकर उनकी किरकरी कराई।
 
वर्ष के दौरान कुछ विवाद महत्वपूर्ण हस्तियों को लेकर हुए जिनमें से ज्यादातर ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े हैं। ऐसे लोगों में सबसे पहला स्थान दीपिका पादुकोण का है जो कि अपनी एक तस्वीर को लेकर बहुत नाराज हुई हैं और उन्होंने इस तरह के चित्र छापने को व्यक्ति की निजता का हनन बताया। एक प्रमुख मीडिया हाउस ने उनकी ऐसी तस्वीर प्रकाशित की जिसमें बड़े गले के कपड़े में उनके वक्षों के बीच का अंतर दर्शया गया था। मीडिया हाउस की इस बात को लेकर आलोचना की गई कि उसने स्त्री को एक वस्तु की तरह प्रदर्शित किया। 
 
एक ऐसा ही विवाद फिल्म अभिनेता आमिर खान की फिल्म 'पीके' के पोस्टर को लेकर हुआ जिसमें आमिर खान को नंगा दिखाया गया था और वे अपने सामने एक ट्रांजिस्टर लिए खड़े हैं। इस पोस्टर से नाराज कार्यकर्ता हेमंत पाटिल ने फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की अपील कर दी थी। इस विवाद का एक दूसरा पहलू यह भी था कि यह एक हॉलीवुड फिल्म के पोस्टर की नकल था। जब तेलंगाना सरकार ने टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा को राज्य का ब्रांड एम्बेसडर बनाया तो पूरे देश में इस फैसले का विरोध होने लगा। लोगों को इस बात पर एतराज था कि वे अब पाकिस्तान की बहू हैं। भाजपा नेता के. लक्ष्मण ने नवगठित राज्य के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि वे इस सम्मान को पाने लायक नहीं हैं।     
 
उनका कहना था कि सानिया इस पुरस्कार के योग्य नहीं हैं क्योंकि उन्होंने तेलंगाना गठन के लिए लोगों के आंदोलन में कभी भाग नहीं लिया। हालांकि उनका जवाब था कि वे एक पाकिस्तानी से विवाहित हैं लेकिन वे भारतीय हैं और वे आजीवन भारतीय ही बनी रहेंगी। वर्ष के दौरान श्वेता वसु प्रसाद का एक विवादास्पद मामला भी सामने आया। फिल्म 'मकड़ी' और 'मकबूल' में उनके अभिनय को सराहा गया लेकिन उन्हें हैदराबाद के बंजारा हिल्स पर वेश्यावृत्ति करने के ‍आरोप में पकड़ा गया था। पकड़े जाने पर उनका कहना था कि 'वे मजबूर थीं और इस कारण से इस धंधे में आईं। उनके सामने और कोई विकल्प नहीं था और फिल्मोद्योग में ऐसी बहुत सी लड़कियां हैं जो कि इस दौर से गुजर चुकी हैं।' इस मामले के सामने आने के बाद ग्लैमर की दुनिया का काला पक्ष भी उजागर हुआ और लोगों ने इस बात पर बल दिया कि ऐसे लोगों को समय पड़ने पर सहायता मुहैया कराई जाए। 
 
मायानगरी का एक और चेहरा लोकप्रिय पार्श्वगायक अंकित तिवारी से सामना आया। उन्होंने 'आशिकी' के गाने गाए हैं। उन्हें वर्सोवा पुलिस ने उनके अंधेरी स्थित घर से गिरफ्तार किया। उन पर एक 28 वर्षीय महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया था। महिला का कहना है कि उसके अंकित के साथ पिछले ढाई वर्ष से संबंध थे। आरोपी ने पीड़िता से शादी करने का वादा करते हुए कई बार ‍बलात्कार किया। महिला का कहना था कि उसने अंकित को विवाह प्रस्ताव रखने के बाद अपने अती‍त से परिचित करा दिया था। आरोपी का कहना था कि वह पीड़िता की बेटी को अपनाने के लिए तैयार है। 
 
यह सिलसिला खेलों से जुड़ी हस्तियों तक चला। क्रिकेटर से नेता बने नवजो‍तसिंह सिद्धू पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने गुरवाणी के शब्दों से छेड़छाड़ की है। सिख धर्म के जानकार लोगों का कहना है कि एक सप्ताह पहले लुधियाना में एक भाषण के दौरान सिद्धू ने गुरवाणी के शब्द बदले और उन्होंने गुरु अर्जुन देव के शब्दों को महाभारतकालीन अर्जुन के शब्द बता दिया। सिद्धू के खिलाफ अकाल तख्त में शिकायत दर्ज कराई गई है। जालंधर में उनके खिलाफ एक पुलिस केस दर्ज कराया गया। इस मामले पर सफाई देते हुए सिद्धू ने कहा, 'वे सिख गुरुओं के सामने झुक सकते हैं लेकिन उन अकाली दल के नेताओं के सामने नहीं जो कि उनके खिलाफ प्रॉक्सी वार चला रहे हैं।' यानी सिद्धू की नाराजगी अकाली नेताओं से है और वे सिख गुरुओं का पूर्ण सम्मान करते हैं।
 
इस वर्ष की अवधि में शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती का कहना था कि साईं बाबा कोई हिंदू देवी-देवता नहीं है, इसलिए उनकी मूर्तियों, तस्वीरों को हिंदू मंदिरों में नहीं होना चाहिए। यह विवाद काफी समय तक चला और इसके दौरान यहां तक कहा गया कि साईं बाबा तो हिंदू ही नहीं थे फिर उनकी पूजा मंदिरों में क्यों की जाती है? शंकराचार्य के समर्थकों ने जहां बाबा की मूर्तियों को मंदिर से बाहर करने का अभियान चलाया वहीं साई भक्तों ने शंकराचार्य के खिलाफ कोर्ट, कचहरियों में मोर्चा खोल दिया। उनका कहना था कि यह निजी श्रद्धा और विश्वास की बात है, इसलिए लोगों को छूट दी जाए कि वे जिसे चाहें उन्हें मानें या ना मानें। लेकिन इस तरह का विवाद खड़ा करके हिंदू समाज को और अधिक विभाजित करने की जरूरत नहीं है और यही उचित भी है। 

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