सुप्रीम कोर्ट भ्रष्टों पर सख्त, कनिमोझी की उम्मीदें टूटीं
मंगलवार, 21 जून 2011( 13:33 IST )
हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्यसभा की सदस्य और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की बेटी कनिमोझी और कलाईगनार टेलीविजन के प्रबंध निदेशक शरद कुमार को जोरदार झटका देते हुए जमानत की याचिका ठुकरा दी है और दोनों को वापस ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्देश दिया है।
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इसका अर्थ यह है कि ट्रायल कोर्ट में जब तक सीबीआई 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कनिमोझी और शरद कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं करती और मुकदमा बाकायदा शुरू नहीं होता तब तक इन दोनों को राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है। कनिमोझी के बहाने सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचारियों को भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने सख्त रवैये से अवगत करवा दिया है।
ट्रायल कोर्ट में जब तक सीबीआई 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कनिमोझी और शरद कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं करती और मुकदमा शुरू नहीं होता तब तक इन दोनों की जमानत की कोई सूरत नहीं बनती। इस काम में महीनों का वक्त लग सकता है। यानी कनिमोझी और उनके सहयोगी को अभी कुछ महीनों तक जेल में रहना पड़ सकता है।
जाहिर है इस खबर को सुनकर द्रविड़ मुनेत्र कषगम के सुप्रीमों करुणानिधि ने अपने सिर के बचे-खुचे बाल भी नोच लिए होंगे। कभी यूपीए सरकार के तारणहार होने के बावजूद वे सरकार पर कोई भी दबाव डालने की स्थिति में नहीं हैं। द्रमुक के कोटे से मंत्री बने ए राजा पहले ही तिहाड़ जेल की शोभा बढ़ा रहे हैं, जबकि पूर्व दूरसंचार मंत्री और वर्तमान कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन पर कभी भी गाज गिर सकती है।
करुणानिधि अपनी बेटी कनिमोझी के जेल जाने से सबसे ज्यादा व्यथित हैं। ऐसे में द्रमुक के केंद्र सरकार में बने रहने में ही उन्हें अपना और अपनी पार्टी का हित नजर आता है। तमिलनाडु के चुनावों में मिली शर्मनाक पराजय ने करुणानिधि की स्थिति और भी कमजोर बना दी है और तमिलनाडु का पिछला इतिहास बताता है कि राजनीतिक बदला लेने के लिए बदनाम मुख्यमंत्री जयललिता मौका मिलते ही करुणानिधि या उनके संबंधियों को टांगने से बाज आने वाली नहीं हैं।
ऐसे में करुणानिधि और उनके समर्थकों के पास चुप रहकर बैठने के अलावा और कोई चारा नहीं है। वे सिर्फ और सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया से ही कोई राहत पा सकते हैं, जिसकी फिलहाल कोई संभावना नजर नहीं आती।
वैसे भी 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से केंद्र सरकार को 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए के राजस्व की हानि उठाना पड़ी है और सुप्रीम कोर्ट सीबीआई जाँच पर खुद कड़ी निगाह रखे हुए है। इसलिए सीबीआई भी कहीं कोई पेंच ढीला नहीं छोड़ सकती। उसे आशंका है कि कनिमोझी जैसी बड़े नेताओं को अगर जमानत मिल गई तो वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि उसने हर अदालत में कनिमोझी की जमानत का पुरजोर विरोध किया।
वैसे भी सीबीआई की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इस तर्क में भी कोई दम नहीं है कि वे तो कलाईगनार टेलीविजन में सिर्फ एक हिस्सेदार थीं, इसलिए उनका इस बात से कोई लेना-देना नहीं कि एक रियलिटी कंपनी से जिसका रिश्ता एक दूरसंचार कंपनी से था, उनकी टीवी कंपनी को 200 करोड़ रुपए के लगभग कैसे मिला। उनकी टीवी कंपनी इस रकम को कर्ज की रकम बताती है, जबकि आम धारणा यह है कि यह 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन में मिली रिश्वत की रकम है।
करुणानिधि को तो खैर मनाना चाहिए कि सीबीआई ने उनकी दूसरी पत्नी और कनिमोझी की सौतेली माँ दयालु अम्मा पर हाथ नहीं डाला है। उनके वकीलों ने कनिमोझी के एक महिला होने और एक नाबालिग बच्चे की माँ होने के नाम पर जमानत माँगी थी, लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट ने इन मानवीय पक्षों पर देश की संपत्ति लूटने के मुद्दे को ज्यादा तरजीह दी तो इसे अनुचित नहीं कहा जाता। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भ्रष्टाचारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है।