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यातायात व्यवस्था भगवान भरोसे

बुरहानपुर | Naidunia| पुनः संशोधित सोमवार, 2 जनवरी 2012 (00:50 IST)
परकोटे के भीतर सघन बसाहट वाले पुराने की व्यवस्था लड़खड़ा रही है। तंग गलियों, वाहनों की बढ़ती संख्या और यातायात की कमी से शहर का ट्रैफिक किसी चुनौती से कम नहीं है।

तेजी से बढ़ते शहर में पर्याप्त यातायात पुलिस नहीं है। तीन दशक पूर्व शहर में शुरू हुए स्थानीय यातायात पुलिस थाने की स्थिति में अभी भी कोई विशेष बदलाव नहीं आया है, जबकि 3 अंतरप्रांतीय राज्य राजमार्ग शहर से लगकर गुजर रहे हैं। इन पर हर समय यातायात का भारी दबाव रहता है। इसका प्रभाव शहर की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ता है। हाईवे-27 शहर के बीच से निकलता है। इस मार्ग पर शाहपुर फाटे से बसाड़ फाटे के बीच के 15 किमी लंबे हिस्से पर यातायात व्यवस्थित रखने के लिए यातायात पुलिस को मशक्कत करना पड़ती है।

सवा दो लाख आबादी पर 32 कर्मी

सवा दो लाख की जनसंख्या वाले शहर में व्यवस्थित यातायात संचालन के लिए स्थानीय यातायात थाने में सूबेदार, तीन उप निरीक्षक, 9 प्रधान आरक्षक व 33 आरक्षकों के पद स्वीकृत हैं। सूबेदार-उपनिरीक्षक का पद रिक्त है। इसके चलते यातायात थाने का कामकाज रक्षित निरीक्षक के भरोसे चल रहा है। पूरे शहर की यातायात व्यवस्था 1 आरआई, 1 सहायक उपनिरीक्षक, 7 प्रधान आरक्षकों व 23 आरक्षकों पर टिकी है।

नेपानगर में एक, शाहपुर में कोई नहीं

शहर के साथ नेपानगर और शाहपुर के हाल भी बेकार हैं। 25 हजार की जनसंख्या वाले नेपानगर की यातायात व्यवस्था मात्र 1 यातायात पुलिस कर्मी के भरोसे है। जो हाल ही में बुरहानपुर से वहाँ पदस्थ हुए हैं। गत कई वर्षों से यातायात पुलिस का था। हालाँकि नेपानगर में यातायात व्यवस्था संभालने के लिए एक प्रधान आरक्षक, 2 आरक्षकों और 3 सैनिकों की पद स्वीकृत हैं। वहीं 20 हजार की जनसंख्या वाले शाहपुर में तो आज भी यातायात पुलिस नहीं है।


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