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भारत तैयार, पाक दबाव में  Search similar articles
त्रिकोणीय श्रृंखला फाइनल
शराफत खान
बांग्लादेश दौरे पर भारत ने अपने दोनों मैच प्रभावी अंदाज में जीते हैं। शनिवार को फाइनल मैच भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा, लेकिन इस फाइनल से पहले ही दोनों टीमों के बीच प्रदर्शन का अंतर सामने आ चुका है।

जहाँ भारत ने अपने दोनों मैच बड़े अंतर (पाकिस्तान को 140 रनों से और बांग्लादेश को 7 विकेट से हराया) से जीते, वहीं पाकिस्तान ने बांग्लादेश को 70 रनों से तो हराया लेकिन भारत से वह बुरी तरह पराजित हुआ। पाकिस्तान टीम को इस हार के बाद अपने क्रिकेट बोर्ड को बहुत से जवाब देने पड़ गए हैं।

बहरहाल अब बात फाइनल की है, नया दिन और एक नया मैच। वैसे महेंद्रसिंह धोनी के नेतृत्व में भारतीय टीम बहुत मजबूत नजर आ रही है। सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जो पिछले डेढ़ दशक से भारतीय क्रिकेट का पर्याय बन चुके थे, उनके बिना भी टीम सफलता की कहानी लिखना सीख गई है। भारतीय युवा ब्रिगेड फिलहाल विश्व के किसी भी आक्रमण की धज्जियाँ उड़ा सकती है।

दूसरी तरफ पाकिस्तान टीम पिछले चालीस सालों में सबसे कमजोर टीम नजर आ रही है। शोएब मलिक के नेतृत्व से लेकर टीम चयन तक कई सवाल उठाए जा रहे हैं। न टीम के कोच खिलाड़ियों के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं और न ही शोएब मलिक टीम चयन से। अगर मलिक अपनी मर्जी से प्लेइंग इलेवन चुनते हैं तो टीम मैनेजमेंट का दखल आड़े आ जाता है। यह शायद वर्तमान दौर में भारत और पाकिस्तान क्रिकेट का सबसे बड़ा अंतर है। दोनों टीमों में युवा खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन क्रिकेट बोर्ड का बहुत बड़ा और शायद कभी न खत्म होने वाला फर्क है।

Dhoni
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धोनी चाहें तो सहवाग जैसे सीनियर खिलाड़ी को अंतिम ग्यारह में न खिलाएँ, लेकिन उनके फैसले पर कम से कम मैनेजेमेंट तो सवाल नहीं उठाएगा, ऐसा पहले हो चुका है, लेकिन अगर शोएब टीम में एक-दो परिवर्तन करना चाहें तो बाद में उन्हें इसका स्पष्टीकरण बोर्ड को देना पड़ता है।

हाल के इस वाकये से एक पुराना किस्सा याद आ रहा है। सन 1999 में इंग्लैंड में हुए विश्वकप का फाइनल मैच ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच खेला गया। पाकिस्तान के कप्तान थे वसीम अकरम, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में खिलाड़ियों का उत्साह बनाए रखा, लेकिन स्टीव वॉ एंड कम्पनी के तूफान में पाकिस्तानी बह गए और फाइनल में उनकी बुरी तरह हार हुई। इस हार के लिए पीसीबी ने अकरम को जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे स्पष्टीकरण माँगा था।

इस घटना के ठीक चार साल बाद 2003 में विश्वकप का फाइनल मैच भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया। सभी को याद है कि भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के 359 रनों के बोझ तले कैसे दब गई थी, लेकिन फाइनल मैच गँवाने के बावजूद भारतीय कप्तान सौरव गांगुली को बोर्ड ने सराहा। यह दो घटनाएँ दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड के रवैये को दर्शाती हैं।

बहरहाल, लौट आते हैं शनिवार को होने वाले फाइनल मैच की तरफ। भारतीय टीम त्रिकोणीय श्रृंखला अपने नाम करने के लिए तैयार है, जबकि पाकिस्तानी टीम पर पिछले खराब प्रदर्शन के अलावा बोर्ड की फटकार का भी दबाव होगा।

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