टायर शेयरों की बिगड़ी स्‍पीड

कमल शर्मा| Last Updated: गुरुवार, 30 अक्टूबर 2014 (18:43 IST)
नेचुरल रबड़ के लगातार महँगा होने से चालू वित्त वर्ष में टायर उद्योग को अब तक लगभग एक हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। लगभग 19 हजार करोड़ रुपए के सालाना कारोबार वाले टायर उद्योग को रबड़, क्रूड और स्‍टील के भाव भड़कने से सबसे ज्‍यादा मार पड़ी है। इसके अलावा आपसी गलाकाट प्रतिस्‍पर्धा ने भी इस उद्योग का बंटाढार किया है। इन सभी कारणों से टायर शेयरों की सेहत बिगड़ती जा रही है।
कोच्चि में आरएसएस-4 (रिबड स्‍मोक्‍ड शीट) के दाम 133 रुपए प्रतिकिलो पहुँच गए हैं जो तीन महीने पहले 100 रुपए के किलो था। रबड़ के बढ़ रहे दामों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने रबड़ में 8 मई 2008 को वायदा रोक दिया था लेकिन तब से अब तक इसके दाम 12 फीसदी बढ़ चुके हैं। मौसम शुष्‍क होने से देश में रबड़ का उत्‍पादन लगभग स्थिर है लेकिन खपत तेजी से बढ़ रही है। अप्रैल में 57 हजार टन रबड़ का उत्‍पादन हुआ जबकि माँग 74 हजार टन रही।
र‍बड़ की बढ़ रही माँग को देखते हुए और भाव बढ़ने की आस में किसानों ने अपने स्‍टॉक को रोकना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि टोक्‍यो रबड़ वायदा अपने 28 वर्ष के उच्‍च स्‍तर 345 येन प्रतिकिलो पर चल रहा है। इस बीच, क्रूड 133 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है। प्राकृतिक रबड़ और क्रूड के बढ़ रहे दामों की वजह से यह उम्‍मीद की जा रही है कि अब उद्योग सिंथेटिक रबड़ की ओर मुड़ेगा।
टायर उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि नेचुरल रबड़ की कीमतों में लगातार तेजी जारी रहने के साथ क्रूड व स्‍टील के बढ़े अनाप शनाप भाव से टायर बनाने वाली कंपनियों की सेहत बिगड़ने की आशंका बढ़ती जा रही है। टायर कंपनियों ने अपने उत्‍पादों के दाम जरुर बढ़ाए हैं लेकिन रबड़, क्रूड व स्‍टील के दामों में हर रोज हो रही बढ़ोतरी से टायर कंपनियाँ यह समझ ही नहीं पा रही कि वे अपने उत्‍पाद के दाम और कितने बढ़ाए। साथ ही ऑटो उद्योग में चल रही मंदी के बीच अब टायर उद्योग के लिए संतुलन बनाना और अपनी विकास दर को कायम रखना बड़ी चुनौती है।
ऑटोमोटिव टायर मैन्‍युफैक्‍चर्स एसोसिएशन (एटमा) के चेयरमैन आर पी सिंघानिया का कहना है कि र‍बड़ के बढ़ रहे दाम टायर उद्योग की सेहत बिगाड़ रहे हैं। देश में इस साल रबड़ का उत्‍पादन 8.39 लाख टन के आसपास होने की संभावना है, जबकि खपत 8.59 लाख टन है। हमारे देश में 75 हजार टन रबड़ आयात किया जाता है और लगभग 45 हजार टन रबड़ का निर्यात होने की संभावना है।
इस बीच, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज में अपोलो टायर का शेयर 28 मई 2008 को 40.95 रुपए पर बंद हुआ जो एक महीने पहले के भाव 45.80 रुपए से 10.59 फीसदी कम है। इसी तरह एमआरएफ 11.69 फीसदी नरम होकर 4576.05 रुपए की तुलना में 4041.10 रुपए, जेके टायर एंड इंडस्‍ट्रीज 1.48 फीसदी घटकर 125.10 रुपए की तुलना में 123.25 रुपए, सीएट 25.56 फीसदी ढीला होकर होकर 133.60 रुपए के बजाय 99.45 रुपए पर बंद हुआ। गुडईयर बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज में 10.95 फीसदी गिरकर 139.25 रुपए से 124 रुपए पर बंद हुआ।


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